दो सौ साल पुराने सूर्य के आभासी पुनरुदन्त पर एक औपचारिकता
हर साल की 30 मई की तरह इस बार भी हिंदी पत्रकारिता दिवस को रस्मी तौर से मनाकर लोग फारिग हो जाएंगे और अपने-अपने काम-धंधों में लग जाएंगे। फिर? शायद ढाई सौ साल होने पर इसे याद करें! वह घड़ी बहुत दूर नहीं है?
