दिल्ली सल्तनत बनाम ‘नई हिंदी’ : ज़टल्ली से Gen-Z तक
आप इंस्टाग्राम खोलिए, एक से एक नारे और एक से एक पिंगल सुनने-देखने को मिलेंगे जिन्हें आज तक इस देश में खुलकर कभी किसी इंकलाबी कार्रवाई में नहीं बरता गया था। दोस्त-यारों के बीच हंसी ठिठोली या मार-झगड़े के दौरान गाली-गलौज की बात अलग है। विडम्बना है कि यही शब्द अब सरकार-विरोधी जुटान को ताकत दे रहे हैं।
