जब लाट साहब गंगाजी से उत्तर भारत की यात्रा पर निकले…
इस यात्रा में उन्हें एक वर्ष सवा दो महीने लगे थे। वे 10 अक्टूबर सन् 1827 को लौटकर कलकत्ते पहुंचे थे। ‘उदन्त मार्तण्ड’ में उनकी यात्रा, दरबार और लोगों से मिलने-जुलने की खबरें बराबर छपा करती थीं।
