1826 के झरोखे से

जब लाट साहब गंगाजी से उत्तर भारत की यात्रा पर निकले…

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इस यात्रा में उन्‍हें एक वर्ष सवा दो महीने लगे थे। वे 10 अक्‍टूबर सन् 1827 को लौटकर कलकत्ते पहुंचे थे। ‘उदन्‍त मार्तण्‍ड’ में उनकी यात्रा, दरबार और लोगों से मिलने-जुलने की खबरें बराबर छपा करती थीं।

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1826 के झरोखे से

‘उजियाली के घमंड’ में चूर ‘बहुत मोटे ओ बड़े’ लोगों के किस्से

Daniel Lambert

उदन्‍त मार्तण्‍ड में सम्‍पन्‍न लोगों की धन सम्‍पदा से लेकर उनके शारीरिक वैभव पर कटाक्ष भी छपते थे। दिलचस्‍प यह था कि समूचे वर्णन के बाद अंतिम पंक्ति में सम्‍पादक अपना पिंगल मार देते थे। ऐसे ही दो उदाहरण 1826 के भादो और अश्विन अंक से प्रस्‍तुत हैं, जिन्‍हें श्री ब्रजेन्‍द्रनाथ बनर्जी ने ‘विशाल भारत’ में पुनर्प्रकाशित किया था। ये दो कहानियाँ जिन दो व्यक्तियों के बारे में हैं, उनमें मोटे आदमी की मृत्यु 1809 और राजा की 1826 में हुई थी- जिस वर्ष उदन्त मार्तण्ड शुरू हुआ था।

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1826 के झरोखे से

ठट्ठे की बात : मुरदे की जोरू और एक खानदानी मुकदमा

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उदन्‍त मार्तण्‍ड में कभी-कभी बड़ी मनोरंजक बातें छपा करती थीं। उदाहरण के लिए आषाढ़ वदी 1 संवत 1883 के मार्तण्‍ड में प्रकाशित हुआ था- ‘फरासीस देशकी खबर’।

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श्री श्रीमान् गवरनर जेनरेल बहादुर का सभा वर्णन

Lord William Amherst

‘उदन्‍त मार्तण्‍ड’ के पहले ही अंक में श्रीमान् गवर्नर जनरल बहादुर का सभावर्णन दिया हुआ है। उस समय लार्ड एमहर्स्‍ट भारत के गवर्नर जनरल थे। ब्रह्मा की लड़ाई समाप्त हो चुकी थी, और ईस्‍ट इंडिया कंपनी और ब्रह्मा के राजाओं में उसी सन् में संधि हुई थी। ‘उदन्‍त मार्तण्‍ड’ में इस संधि की शर्तें प्रकाशित हुई थीं। इस संधि के उपलक्ष में जो दरबार हुआ था, उसी का वर्णन ‘श्री श्रीमान् गवरनर जेनरेल बहादुर का सभा वर्णन’ शीर्षक में दिया गया था।

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हिंदुस्तानियों के हित के हेत : इस कागज के प्रकाशक का इश्तेहार

सब लोग पराये सुख सुखी होते हैं जैसे पराए धन धनी होना ओ अपनी रहते पराई आंख देखना वैसे ही जिस गुणमें जिसकी पैठ न हो उसको उसके रसका स्‍वाद मिलना कठिन ही है और हिंदुस्‍तानियों में बहुतेरे ऐसे हैं कि पराई चाल देखकर अपनी यहां तक भुले हैं कि परायोंमें जो बुद्धिमन्‍त है वे अपनी तो बनी बनाइ है पर पराई पर भले बुरेका वराव करने का वाना बान्‍धते हैं

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