दुनिया 200 साल बाद

बनारस से अशोक बनवासी की चिट्ठी

दुनिया में बहुत दुख है। दुख की सुनवाई इस दुनिया में कहीं दिखती नहीं। अशोक बनवासी ऐसा ही एक दुखियारा है। बनारस में पुलिस उत्‍पीड़न पर 11 अगस्‍त को एक कार्यक्रम हो रहा था। उसी में श्रोताओं के बीच से अचानक उठकर अशोक मंच तक आया और उसने कंप्‍यूटर पर टाइप की हुई एक अनगढ़-सी चिट्ठी सभा के अध्‍यक्ष को बिना कुछ बोले थमा दी और वापस अपनी जगह पर लौट गया।

इस कहानी की तस्‍वीर में दिख रही दुखियारों की भीड़ में अशोक बनवासी कोई भी हो सकता है। आप गौर से देखें तो उसे पहचान भी सकते हैं। उसकी दी हुई चिट्ठी को नीचे जस का तस छापा जा रहा है। यह कहानी अकेले अशोक की नहीं, उन सैकड़ों लोगों की हो सकती है जिन्‍हें केवल उनकी पैदाइश के चलते अपराधी मान लिया जाता है।

यह चिट्ठी आगे की कार्रवाई के लिए बनारस की संस्‍था जनमित्र न्‍यास को सौंपी जा चुकी है, जो मुसहरों के हित काम करती है। चिट्ठी पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से किए गए पत्राचार का ब्योरा चिट्ठी के अंत में है।  


अशोक बनवासी की चिट्ठी

महोदय,

प्रार्थी अशोक बनवासी पुत्र घोघई निवासी बरही नेवादा थाना- फूलपुर जनपद-वाराणसी का रहने वाला अनुसूचित जनजाति (मुसहर) बिरादरी का गरीब, भूमिहीन व्यक्ति है। प्रार्थी ग्राम कठिराँव जनपद- वाराणसी के विनोद पटेल के ईंट भट्ठे पर विगत 3-4 वर्षों से अपने परिवार पत्नी व छोटे-छोटे बच्चों के साथ उपरोक्त ईंट भट्ठे पर स्थाई रूप से रहकर दिन रात पथाई (ईंट) व दुलाई (ईंट) का कार्य कर रहा है।

प्रार्थी एक जनजाति का गरीब मुसहर है जिसका जीवन समाज का जूठा पत्तल उठाकर, जूठा फेका खाना खाकर व्यतीत होता चला आ रहा है। प्रार्थी द्वारा कोई भी गैर कानूनी कृत्य, चोरी, डकैती, लूट हत्या आदि अपराध कभी ना तो कारित किए गए और ना ही प्रार्थी का उपरोक्त कृत्यों से किसी किस्‍म का कोई वास्ता या सरोकार आज तक कभी रहा।

प्रार्थी का मात्र एक अपराध यही है कि प्रार्थी एक मुसहर अनुसूचित जनजाति का गरीब, वस्‍त्र व अन्‍नविहीन झोपड़ी में रहने वाला गरीब मजदूर है। महोदय, पुलिस विभाग प्रार्थी को जबरदस्ती निरपराध बिला किसी अपराध एवं कृत्य के अपराधी बनाती चली आ रही है और प्रार्थी के बाल बच्चे भी पुलिस विभाग की मनमानी पेशेबन्दी, फर्जी मुकदमा में एक साथ तमामी थानो में कायम तनाम चोरी के मुकदमें में, प्रार्थी को अभियुक्त बनाकर कारागार में निरुद्ध कराती चली आ रही है।

प्रार्थी पुलिस विभाग की इस मनमानी एवं झूठी फर्जी कारगुजारी एवं पेशेबन्दी से अपनी मजलूम एवं बेवस जिन्दगी से ऊब चुका है और प्रार्थी माननीय महोदय से अपनी बेबसी व गरीबी एवं एक मुसहर होने की जीवन जीने की भीख मांग रहा है कि प्रार्थी के साथ जिस तरह से थाना-फूलपुर वाराणसी थाना- सिन्धोरा वाराणसी एवं थाना कषसेठी वाराणसी एवं जनपद जौनपुर में थाना- जलालपुर जौनपुर की पुलिस के द्वारा प्रार्थी की बेगुनाही को ताक पर रख कर महज इस वजह से प्रार्थी एक मुसहर है और उसकी कोई आवाज नहीं है, अभियुक्त बना बना कर कारागार में किस प्रकार निरुद्ध किया जा रहा है।

सर्व प्रथम दिनांक 14-12-2024 को प्रार्थी विनोद पटेल कठिशव फूलपुर वाराणसी के ईट भठले पर अपने परिवार के साथ मण्डनी में अपने बच्चों के साथ रूखी सूखी खाना खा रहा था तभी थाना फूलपुर वाराणसी की पुलिस जीप से भट्ठे पर आती है और प्रार्थी का का हाथ मुह बांध कर, एक नवर की तरह पुलिस जीप में में उफल कर बैठा लिया गया, प्रार्थी के बाल-बच्चे पुलिस के इस अमानधीय कृत्य को देखकर भयाकान्त, चिल्लाते रहे लेकिन पुलिस वालो ने कुछ भी नही सुना और ले जाकर थाना जलालपुर जौनपुर में हवालात में बन्द करके एक झूठी कहानी, लूट की योजना पुलिया पर प्रार्थी को अन्य पूर्व से योजना बनान के आमयाग भजानवर जला मालपुर जौनपुर की पुलिस ने. “पूरेव पूरेव नहर” पुलिया प दिनांक 14-12-2024 को बन्दी बनाते हुए, अपने थाना क्षेत्र, त्रिलोचन काली मन्दिर थाना- “मे दिनांक 29/30-/30-11-2024 में हुई चोरी, अक्टूबर वर्ष 2024 में थाना- फूलपुर उराणसी के क्षेत्र कुआर बाजार के मन्दिर में हुई चोरी तथा 08-12-2024 की तिथि में, भद्रकाली मांजर सरॉव थाना कपसेठी वाराणसी में हुई चोरी एवं नेवड़िया थाना- जौनपुर में हुई चोरी तथा 24-09-2024 में थाना सिन्धोरा वाराणसी के बुगचौ गाँव के भगवती मन्दिर में हुई चोरी का झूठा इकबालिया बयान अंकित करते हुए उपरोक्त सभी थाने की पुलिस के साथ पेशेबन्दी एवं फर्जी मनगढ़न्त साजिश के तहत आरोपित करते हुए उपरोक्त सम्पूर्ण सम्बन्धित थाना पुलिस में कायम चोरी के मुकदमें में सनलिप्‍त करार कराते हुए बन्दी बना दिया और प्राथी गयका दिनांक 14-12-2024 को सभी थाना क्षेत्र में बन्दी बना दिया गया प्रार्थी एक गरीब मुसहरा अनुसूचित जन जाति का बनवासी समुदाय का निर्धन असहाय कमजोर व्यक्ति है जिसका कोई सामाजिक सहारा भी नहीं, प्रार्थी के छोटे छोटे बच्चे भूखो मरने लगे, प्रार्थी की पत्नी तमामी आर्थिक बोझ के तहत तमाम लोगो से अपनी गुजास्‍त करके किसी तरह प्रार्थी की जमानत, जनपद जौनपुर व जनपद वाराणसी की न्याय पालिका से कराया और जिला कारागार से आकर अपने आर्थिक बोझ को उतारने के लिए मजदूरी ईंट पथाई व दुलाई का करना शुरू किया कि अभी दो माह भी प्रार्थी को जेल से बाहर आए नही हुआ कि तत्काल थाना फूलपुर वाराणसी की पुलिस द्वारा उत्तर प्रदेश गैंगेस्टर एक्ट के तहत दिनांक 04-08-2025 को, प्रार्थी को जिला कारागार में निरुद्ध करा दिया। थाना- फूलपुर वाराणसी की पुलिस द्वारा उपरोक्त चोरियों में दिनांक-14-12-2024 को थाना जलालपुर जौनपुर द्वारा फर्जी लूट की योजना में निरुद्ध कर व कराकर प्रार्थी के इकबालिया बयान उपरोक्त चोरी का लिखकर गैगचार्ट तैयार कर करके उपरोक्त गैंगेस्टर एक्ट की कार्यवाही की गयी, प्रार्थी माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा जमानत पर दिनांक-17-03-2026 को जिला कारागार वाराणसी से बाहर हुआ।

दिनांक-20-03-2026 को पुनः थाना- फूलपुर वाराणसी की पुलिस पुनः प्रार्थी को तलाश करते हुए प्रार्थी के घर पर गयी और पुनः प्रार्थी को तलाश जांच करना शुरू किया। प्रार्थी भागकर श्रीमान् जी के यहाँ अपनी पीड़ा और पुलिस के द्वारा इस प्रकार की फर्जी कार्यवाही व पुलिस द्वारा हो रहे जुल्म की गुजास्‍त कर रहा और प्रार्थी अपनी जिन्दगी की गुजास्‍ता कर रहा है, प्रार्थी का जीना पुलिस वालो ने हराम कर दिया है, प्रार्थी कहा चला जाय, कहा भाग जाय, प्रार्थी अपने पूरे परिवार के साथ आत्मदाह कर लेवे क्या करें कुछ भी समझ में नही आ रहा है।

प्रार्थी एक निहायत गरीब, परित्यक्त मुसहरा अनु० जन जाति का है प्रार्थी का कोई सहारा नही है, महोदय, प्रार्थी की जान पुलिस उत्पीड़न से बचावे तथा प्रार्थी को अपराधी ना बनाचे, प्रार्थी की बेगुनाही की जाँच अपने स्तर से कराकर सम्बन्धित पुलिस कर्मियो को उनके फैल वेजा गैर कानूनी कृत्य के लिए उनके विरुद्ध कार्यवाही करें तथा प्रार्थी के बाल बच्चो को मात्र इस दुनियां में जन्म लेने के कारण जीने का हक प्रदान करें ताकि न्याय हो। ” अन्यथा प्रार्थी के पास सामूहिक आत्मदाह करने के कोई दूसरा विकल्प नही है प्रार्थी का इस दुनियां में कोई सामाजिक अस्तित्व नही है।

प्रार्थी
अशोक