दुनिया 200 साल बाद

बनारस से अशोक बनवासी की चिट्ठी

इस कहानी की तस्‍वीर में दिख रही दुखियारों की भीड़ में अशोक बनवासी कोई भी हो सकता है। आप गौर से देखें तो उसे पहचान भी सकते हैं। उसकी दी हुई चिट्ठी को नीचे जस का तस छापा जा रहा है। यह कहानी अकेले अशोक की नहीं, उन सैकड़ों लोगों की हो सकती है जिन्‍हें केवल उनकी पैदाइश के चलते अपराधी मान लिया जाता है।

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