1826 के झरोखे से

‘उजियाली के घमंड’ में चूर ‘बहुत मोटे ओ बड़े’ लोगों के किस्से

Daniel Lambert

उदन्‍त मार्तण्‍ड में सम्‍पन्‍न लोगों की धन सम्‍पदा से लेकर उनके शारीरिक वैभव पर कटाक्ष भी छपते थे। दिलचस्‍प यह था कि समूचे वर्णन के बाद अंतिम पंक्ति में सम्‍पादक अपना पिंगल मार देते थे। ऐसे ही दो उदाहरण 1826 के भादो और अश्विन अंक से प्रस्‍तुत हैं, जिन्‍हें श्री ब्रजेन्‍द्रनाथ बनर्जी ने ‘विशाल भारत’ में पुनर्प्रकाशित किया था। ये दो कहानियाँ जिन दो व्यक्तियों के बारे में हैं, उनमें मोटे आदमी की मृत्यु 1809 और राजा की 1826 में हुई थी- जिस वर्ष उदन्त मार्तण्ड शुरू हुआ था।

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दुनिया 200 साल बाद

कोउ नृप होय हमै ही हानी… अमीनुल हक की यही कहानी!

Sculpture of the Ahom rebellion as seen in Shaheedi Park, Delhi.

दो सौ साल की उम्र वाले असम और पचहत्तर साल से ज्‍यादा उम्र वाले इस भारतीय गणतंत्र में नागरिकता का संकट हास्‍यास्‍पद स्‍तर तक राजाज्ञा और विशेषाधिकार का मामला बन चुका है

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दुनिया 200 साल बाद

नागरिकता की बहस में ग़ाज़ीपुर के एक गुमनाम बाग़ी की याद

वे खुद को इस देश का ‘प्रथम नागरिक’ कहते थे। उनका दावा था कि आधुनिक भारत में नागरिकता की कानूनी स्थिति एक ‘फर्जीवाड़ा’ है। आज यही बात दबी जबान वे तमाम बड़े-बड़े लोग कह रहे हैं जिन्‍हें पढ़ा-लिखा माना जाता है।

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दुनिया 200 साल बाद

छावनी की जिंदगी, जिंदगी की छावनी…

हर बार कहीं कुछ संवेदनशील होता है तो वहां अचानक ‘छावनी’ क्‍यों बन जाती है? और ये अखबार वाले सकारात्‍मक लहजे में इसकी मुनादी क्‍यों करते हैं? आखिर इसका मतलब क्‍या है? छावनियों से बाहर रहने वाले इस देश के सवा अरब से ज्‍यादा लोगों को नहीं पता कि छावनी की जिंदगी कैसी होती है, जब तक कि उनके अपने शहर में किसी दिन कोई जगह छावनी नहीं बना दी जाती।

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दुनिया 200 साल बाद

मक्‍खी और परवाने का किस्‍सा

आज 14 जून हो गया। छह जून को जंतर-मंतर पर इस देश के शिक्षा मंत्री की ‘तेरहवीं’ की जो मीयाद कॉकरोचों ने रखी थी वह बीत गई। इस्‍तीफा नहीं हुआ। अल्‍टीमेटम की मीयाद अब बदल चुकी है। अब वे फिर आएंगे। 20 जून को। आखिर रोशनी खोजने वापस वहीं लौट-लौट कर कौन आता है? जिसको सर्टिफिकेट चाहिए…! इस बारे में एक दिलचस्‍प कहानी सुनाते हैं उस्‍ताद फ़रीद अयाज़…

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दुनिया 200 साल बाद

दिल्ली में मोबाइल चोरों के नाम एक दिन

संसद मार्ग थाने में पुलिस ने 10-15 चोरों को बिठा रखा था क्योंकि खुद दिल्ली पुलिस के एक अफसर का मोबाइल चोरी हो गया था। इसी वजह से पुलिस मुस्तैद हुई और नौजवान का फोन मिल गया।

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1826 के झरोखे से

ठट्ठे की बात : मुरदे की जोरू और एक खानदानी मुकदमा

Representational Image by AI

उदन्‍त मार्तण्‍ड में कभी-कभी बड़ी मनोरंजक बातें छपा करती थीं। उदाहरण के लिए आषाढ़ वदी 1 संवत 1883 के मार्तण्‍ड में प्रकाशित हुआ था- ‘फरासीस देशकी खबर’।

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दुनिया 200 साल बाद

पर्यावरण पर पालेबाजी से आखिर किसकी जान पहले बच जाएगी?

Press Conference 22 May PCI

जिन्‍हें जनजातियों के पर्यावरण की चिंता थी, उन्‍हें तो दिल्‍ली के प्रेस क्‍लब में सुनने के लिए कायदे से तीस लोग भी नहीं आए थे। इन्‍होंने जो चिट्ठी भेजी है प्रधान जज को पिछली 22 तारीख को, वो शायद उन्‍हें मिल गई होगी। उस पर देश भर से 340 लोगों के दस्‍तखत हैं, लेकिन वे उसे क्‍यों पढ़ेंगे?

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दुनिया 200 साल बाद

दो सौ साल पुराने सूर्य के आभासी पुनरुदन्‍त पर एक औपचारिकता

हर साल की 30 मई की तरह इस बार भी हिंदी पत्रकारिता दिवस को रस्‍मी तौर से मनाकर लोग फारिग हो जाएंगे और अपने-अपने काम-धंधों में लग जाएंगे। फिर? शायद ढाई सौ साल होने पर इसे याद करें! वह घड़ी बहुत दूर नहीं है?

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दुनिया 200 साल बाद

हिंदुस्‍तान का कॉकरोच प्रसंग और मलेशिया की एक कविता

Cecil Rajendra

दशकों पहले मलेशियाई अधिवक्‍ता और कवि सेसिल राजेंद्रा ने यह विलक्षण कविता लिखी थी जो इस प्रसंग की मूर्खता को कहीं बेहतर ढंग से अभिव्‍यक्‍त करती है, बजाय इसके कि इस पर कोई आडंबरपूर्ण संपादकीय लिखा जाय!

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