दुनिया 200 साल बाद

काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस : कलकत्ता वाया बनारस

लड़के ने ऊपर से मुंडी बाहर निकालते हुए कहा, अंकल अंदर की कहानी है। मैं पॉलिटिक्स पर बात नहीं करता, लेकिन खेल हुआ है। मैं वहीं का हूं, जानता हूं। बाकी, मंदिर तो बहुत भव्य बना है। योगी मोदी नहीं बनवाते तो ऐसा स्वरूप निकल के नहीं आता। इस पर श्रीवास्तव जी कुछ नहीं बोले। उनकी बिटिया ने चुपके से बाप से कहा, लगता है भैया भाजपाई हैं! बै…

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दुनिया 200 साल बाद

उस्‍ताद के उजड़े दयार पर तीन घंटे

रवींद्रनाथ को पढ़ने के लिए आपको शांति निकेतन में जाना होगा। समेट दिया कोने में। रवींद्रनाथजी वहीं बैठे हैं। पेड़ के नीचे। आप कल्‍चर की बात कर रहे हैं, यहां छोटा बच्‍चा गाली से बात करना शुरू करता है। कल्‍चर गायब हो चुका है। कुछ नहीं है। यहां का हालत बहुत खराब है। आप जिन लोगों से बात कर रहे हैं न, वो दिन में गांजा पीते हैं और रात में शराब पीते हैं। काम क्‍या करते हैं, पॉलिटिक्‍स…

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दुनिया 200 साल बाद

सड़क के रिश्‍ते

ऐसा लगता है कि पूरा शहर किसी आश्वस्ति के लंबे बहकावे में है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि कलकत्ता दरअसल अतियों का शहर है। या कहें कि बंगाल अतियों की धरती है। अपने बिद्यार्थी दादा कहते हैं कि इस जमीन ने जितने बिप्‍लवी पैदा किए उतने ही क्‍लर्क भी पैदा किए हैं। यानी, यहां बदलाव किसी एक चरम पर जाकर ही होता है वरना लंबे समय तक यथास्थिति बनी रहती है। फिलहाल शहर के लोगों से बात कर के लगता है कि वे यथास्थिति के मूड में हैं।

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दुनिया 200 साल बाद

दो सौ साल बाद 37, अमड़ातला गली की तलाश…

चायपत्ती वाले का कहना था कि इमारत पहले किसी मुसलमान की थी जिससे चायपत्ती वाले मारवाड़ी ने खरीद कर जमींदोज कर दिया और नई बनवाई। कौन जाने उस मुसलमान ने भी किसी और से न खरीदी रही हो। जो पता इतिहास में ‘अमड़ातला की गली 37 अंक’ के नाम से दर्ज हो ही चुका है, वहां 27 मकानों के बीच 37वां खोजना वैसे भी बेवकूफी ही होती। क्‍या करते हम मालिक से मिल के!

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1826 के झरोखे से

हिंदुस्तानियों के हित के हेत : इस कागज के प्रकाशक का इश्तेहार

सब लोग पराये सुख सुखी होते हैं जैसे पराए धन धनी होना ओ अपनी रहते पराई आंख देखना वैसे ही जिस गुणमें जिसकी पैठ न हो उसको उसके रसका स्‍वाद मिलना कठिन ही है और हिंदुस्‍तानियों में बहुतेरे ऐसे हैं कि पराई चाल देखकर अपनी यहां तक भुले हैं कि परायोंमें जो बुद्धिमन्‍त है वे अपनी तो बनी बनाइ है पर पराई पर भले बुरेका वराव करने का वाना बान्‍धते हैं

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