दुनिया 200 साल बाद

बनारसियों के लिए दालमंडी कोई मुद्दा क्यों नहीं है? फिर भी लोग नाराज हैं…

सुनते ही वे बोले- दालमंडी? अरे, उधर हम गए तो नहीं हैं इधर बीच लेकिन सुन रहे हैं कि कुछ तोड़ा फोड़ा है। रोजे गुजरते हैं उस रास्‍ते से लेकिन भइया अंदर कौन जाए। हालांकि हमको दिखा नहीं कहीं कुछ तोड़फोड़। बाकी कर रहा है तो सहिये कर रहा होगा। जरूरी है।

देखिए, श्‍यामदेव दादा चौधरी का और एक हमारे यहां स्‍वतंत्रता सेनानी थे अनंत देव शर्मा उनका, कई स्‍वतंत्रता सेनानियों का कब्‍जा है उस गली में। दालमंडी के ठीक जैसे पीछे से जो रास्‍ता गया है चौक थाना के समनवा से ऊ सीधा विश्‍वनाथ मंदिर के पीछे चार नंबर गेट पर निकला है। उसमें कम से कम कई मकान पैंतीस रुपया तीस रुपया पर कब्‍जा है। बता तो रहे हैं उसमें हम कई दिन तक रुके हैं मकान में। हां, हमारे मित्र का कब्‍जा था। हम बोले यार ई मकान जर्जर है कभी भी बैठ सकता है। कहे अब क्‍या करेंगे ई लोग स्‍वतंत्रता सेनानी थे बाबा ओबा इन्‍हीं लोगों को अलाट है कोई पैंतीस रुपया कोई चालीस रुपया किराये पर। हम कहे अरे हटाओ यार ये सब गंदगी रोड खाली करो। यहां बढि़या बनवा के फ्लैट तुम लोगों को बाहर दे दें। ये रास्‍ता तो… इतनी जर्जर बिल्डिंगें हैं अंदर कालोनी में दालमंडी से ले के नई सड़क के बीच में, कहीं ऐसा न हो कि कभी भरभरा के गिरे और बैठ जाए। सब कब्‍जा किए है। अस्‍सी पर आधा हमको लगता है मकान कब्‍जे में है। मठवाले कब्‍जा किए हैं भदैनी अस्‍सी पर। आप जाइए देखिए सब राजाओं का है। सब पहले का बना है। हिल गया है। कोई अस्‍सी साल से कोई सत्तर साल डेढ़ सौ साल से कब्‍जा है। जीर्णोद्धार उसका होना चाहिए। अब उस कब्‍जे की वजह से न ऊ मकान बनवा रहे हैं न जीर्णोद्धार कर रहे हैं। उसी तरह पुराना… अब ये है कि कुछ चीजें तो रहना चाहिए। पता कैसे चलेगा कि काशी कहां है सब तोड़ के बना देंगे तो। हम क्‍या जानेंगे कि ये चीज है।

देखिए जहां आवश्‍यकता है वहां आप करो। अब हर जगह रोडे बनाओगे तो आदमी जाएगा कहां। हर जगह खेत लेकर स्‍टेडियम बनाओगे, हां, मर जाएगा आदमी। साला तुम्‍हारा विकास हो रहा है कि विनाश कर रहे हो? हम तो देखिए पक्‍का भाजपाई हैं लेकिन हम तो यही देख रहे हैं कि भारत जो है एक श्रेष्‍ठ बनाने के चक्‍कर में मोदी जी सबके हाथ में जातिवाद का कटोरा थमा दिए हैं। जाति के नाम पर लोग मरने के लिए तैयार हैं। एक जाति दूसरे जाति को नहीं देख रहा है। ब्राह्मण को शूद्र नहीं देख रहा है। ये स्थिति है। कम से कम कांग्रेस में ये तो नहीं था। लड़ाई हिंदू-मुस्लिम की थी, अब तो हिंदू-हिंदू की लड़ाई है। खतरे वाली बात है। उस बार जितना वोटिया मोदी को मिला न, लगभग सत्तर परसेंट भाग जाएगा इनको। हकीकत है!

तोड़फोड़ नहीं, ये यूजीसी। तोड़फोड़ से तो सब खुश है। तोड़फोड़ से कोई नाराज नहीं। हकीकत मैं बताऊं। तोड़फोड़ से देखिए, तोड़फोड़ से सबको ये है कि रास्‍ता खाली हो जाएगा। और दूसरी बात ये भविष्‍य के लिए बहुत खतरा है। जहां तोड़ कर रहे हैं योगीजी न, ये मिनी पाकिस्तान बनने वाला है कुछ दिन में। ये और लोहता, आप कभी निकल नहीं सकते। जिस दिन चाहेंगे ये सब कई हिंदू को एक साथ काट देंगे। तो ऐसे जगह तो दरार डालना ही चाहिए। फाड़ देना चाहिए दो फाट में। जहां एकदम घनिष्‍ठता हो इनकी, जाल हो, उसमें आप सुरंग बना दो क्‍योंकि ऐसा न हो कि गाड़ी उसमें ना जाए पाए प्रशासन का। लोहता में आप कभी भी इनकी बस्‍ती में हलिए फोरवीलर लेकर प्रशासन इस पार से उस पार नहीं निकल सकता। चार चार फुट की गली है। इधर से मोटरसाइकिल से जाएंगे। इस गली से उस गली से उस गली से निकल जाइए एकदम आपको बचना मुश्किल है। तो ऐसी जगह आप सुरंग डालो तो ठीक है।

खाली यूजीसी से मोदीजी के रुष्‍ट हैं। जो जातिवाद का ये बीज बोये हैं न, मोदीजी को जितने लोग भगवान मानते थे आज तेली कह रहे हैं, पक्‍का बैकवर्डवादी राजनीति कह रहे हैं कि भइया इसके दिमाग में तो पहले ये था कि एक समान सब है अब तो ये…

वे बोलते गए, हम सुनते रहे:

हम याद करते हैं 2014 के चुनाव में, उस समय टूरिस्‍ट गुजराती आए थे घूमने के लिए काशी। पूछे क्‍या माहौल है। बोले आप किस जाति से हैं। हम कहे कि हम तो भूमिहार ब्राह्मण हैं। पूछे भूमिहार? हम कहे कि ब्राह्मणों में कई जातियां हैं, तो हम लोग ब्राह्मणों में भूमिहार हैं। कहे भाई साहब, मोदीजी को वोट मत दीजिएगा। गुजराती ब्राह्मण जो था, वही बोला। हम कहे क्‍यों सर आप तो गुजरात से हैं, मोदीजी भी गुजरात से हैं, ऐसा क्‍यों बोल रहे हैं। वो बोला, ये आदमी ब्राह्मणों को एकदम लाइक नहीं करता। कसम बता रहे हैं एकदम गणेशजी की कसम। कहे ये आदमी ब्राहृमणों को लाइक नहीं करता, ब्राह्मणों का ये सत्‍यानाश कर देगा। हम कहे लगता है कि आप वहां कांग्रेस की पार्टी के हैं और इसलिए बुराई बतिया रहे हैं, मोदीजी ने तो बहुत अच्‍छा काम किया है सुनते हैं गुजरात में। हम कहा देखिए हमारे न देने से बनारस में कोई फर्क नहीं पड़ता, यहां मोदीमय है। यहां भाजपा हमेशा से है। मोदी आएं न आएं यहां भाजपा को ही वोट पड़ता है, इसको कोई टार नहीं सकता। उस समय तो लहर था न। कहा, पछताओगे। बोला, ये सवर्णों का पक्‍का विरोधी हैं।

हम लोग 2014 में तो दे दिए, 2019 में ये आते आते रंग बदल दिए। आपको हम बता दें कि सौ परसेंट सामान्‍य में नब्‍बे परसेंट लोग इसको मानते हैं। हम हकीकत बता रहे हैं। बैकवर्ड में तो जाति में वोट बंटता है। कोई अपना दल को देता है तो कोई कांग्रेस को, सब अपने अपने में लेकिन सवर्ण तो एकदम आंख मूंद के इसको देते हैं। इसके बाद इसको अहंकार हुआ। अब 2024 का देख लीजिए। 2024 में एकदम हौवा में हो गए चार सौ पार चार सौ पार, और उसके बाद कुछ लोग गए घर से वोट दिए कुछ लोग नहीं दिए। इनका कितना नोसकान हुआ यूपी में, तीस चालीस सीट गई। आज यूपी में अगर चुनाव हो तो दस से बारह सीट ये मुश्किल से पा सकते हैं। सवर्ण के नेता भी जो हैं न उनको भी कोई वोट नहीं देगा क्‍योंकि तुम विरोध ही नहीं कर रहे हो। ठीक है मोदीजी को हम वोट दिए तुमको हम पचास साठ सीट जिताये सवर्णों को पार्लियामेन्‍ट में, तुम्‍हारी एक एकता होनी चाहिए न, कि मोदीजी जो कह रहे हैं सब सहिये थोड़ी कह रहे हैं। ठीक है यूजीसी लाए, ठीक है दलित के लिए तुम कर रहे हो। दलित के लिए सत्तर साल से सब सरकार कर रहा है। अभी तक वो नहीं बदले।

जातियों से नफरत किसी को नहीं था, गंदगी से नफरत है। आज तुम इतना आवास दे दिए लेकिन उसके बाद भी मुसहर बस्‍ती में जाइए देखिए दरवाजे पर कितनी गंदगी है। कराओ डेंट पेंट, जब वो उठना नहीं चाहते हैं तो कैसे उठाओगे उनको। ऐं? मतलब उनको उठाने के लिए आप जो है योग्‍यता का हनन करोगे? आर्थिक आधार पर आप आरक्षण लागू करो, हर जाति में गरीब हैं। रोजगार दो उनको, कि आप खाली उनको सहायता दे रहे हो। कितना दोगे? पहले काम तो कराओ कि बैठा के खिलाओगे भिखमंगों की तरह जो है कोटेदारों से कहोगे कि राशन दो बांटो इनको बैठ के खाएं। भिखारी बना रहे हो तुम, अपंग बना रहे हो। वो अपने पुरुषार्थ पर खा जी नहीं सकते। हमको अपने पेट भर भोजन मिलेगा तो हम यहां नौकरी करने आएंगे, ऐं?

आज हमारे घर का खर्चा पांच सौ रुपया रोज का है मिनिमम मान के चलिए, अगर हम हजार रुपया नहीं कमाएंगे तो पांच सौ रुपया हमारा बचत मेडिकल के लिए या पढ़ाई के लिए हमारा नहीं बचेगा तो हमारा घर नहीं चलेगा। उनको तो सब फ्री किए हो। घर भी बनवा दे रहे हो। फिर वो काहे बदे कमाने जाएंगे? तुम तो देश का स्थिति और खराब कर दे रहे हो। इसलिए उनकी नीतियों से हमको अब अच्‍छा नहीं लगता।

ठीक है, आपने बहुत काम किया लेकिन सबसे बड़ी चीज ये है कि तुम फूट मत डालो, आपस में लड़ाओ मत। जो भाईचारा कि एक साथ लोग पटेल, यादव सब बैठ के खा रहे हैं तुम उसमें अब घृणा कर रहे हो। अगर ऐसे ही आप कानून धारा बनाओगे कौन यादवों को निमंत्रण देगा, भइया के बोलाई इनके विवाद हो जाई दफा लग जाई। अब तो घृणा नहीं न है, पहले था। हम लोग बचपन में देखे हैं, लेकिन इसलिए क्‍योंकि उनकी जाति से नहीं गंदगी से घृणा थी। अब फिर तुम वहीं धकेलना चाहते हो उनको? आज जाइए कोई हरिजन से कहिए मेरा हर जोतिये महीना पर तुमको तनख्‍वाह देंगे कोई नहीं तैयार होगा। हम अठारह बीघा के काश्‍तकार हैं। पहले हमारे यहां साल भर के लिए एक मजदूरा काम करता था। आज हम मटर तोड़ने के लिए छिम्‍मी तोड़ने के लिए सरसों काटने के लिए जाते हैं तो एक मजदूर नहीं मिलता। फिर आप उसी में धकेल रहे हो उनको? कम से कम कमा खा रहे हैं आप जातियों में मत बांटो। ऊ जमाना गया। अब फिर से तुम वही दलित वही सवर्णों का शोषण, केतना दिन के लिए गाओगे, हैं? हमारे बाप दादाओं ने मारा तो उनकी कमी रही होगी या कुछ भी रहे पर उसका भुक्‍तभोगी हम लोग क्‍यों हों? वही चीज आज तुम उजागर कर रहे हो केवल कुर्सी के लिए? जो चीज आदमी भुला दिया आज उसको याद दिला दिला के इनको कितना सर पर बैठाओगे? तो ये उसकी राजनीति है अंग्रेजों वाली।

अरे, आज भी हम यहां अकेले बैठते हैं तो उस गुजराती का बात याद आता है। हमारे मित्र से हमसे विवाद हो गया इसीलिए, वो मंडल अध्‍यक्ष था राजातलाब का, नमामि गंगे का सदस्‍य भी रहा। ऐसे ही बात होने लगा तो हम उससे कहे कि हमारे होटल में एक गुजराती भाई आया था, वो ऐसा ऐसा कह रहा था। उसको लगा कि ये अजय राय के रिश्‍तेदार हैं, तो हमसे शरारत करने लगा। कहा आप लोग ऐसे वैसे, मने हमसे कुछ दिन वो बोला नहीं, हमको फेसबुक पर ब्‍लाक कर दिया।

वो फिर से सवर्णो में कोई ऐसा मुद्दा डाल देगा कि आपस में लड़ाएगा लेकिन सवर्ण लड़ेंगे नहीं आपस में, ठीक है मिले जिसको मिले। हमारा कहना है बस गरीब को मिले, जरूरतमंद को मिले। हकीकत ये है कि जो मजबूत है उसी को आरक्षण मिल रहा है, गरीब को नहीं। हरिजन परिवार में भी जो नौकरी पा गया है उसी को मिल रहा है। आप हर घर से एक एक को दे दो जिसके घर में सर्विस नहीं है। तब आरक्षण का फायदा होगा। जिनको है वही को मिल रहा है। अब जज है, उसके खानदान को आप आरक्षण पर आरक्षण दिए जा रहे हो। वो और मजबूत होता जा रहा है। क्‍या फायदा है इससे? मिलता उसी को है जिसके पास पैसा है, जो मजबूत है। यही सब तो है।

वे थमे। एक बात तो तय हुई कि तोड़फोड़ चुनावी मुद्दा नहीं बन सकता, चाहे घाट और मंदिरों का हो या दालमंडी का। 2019 का चुनाव गवाह है। मुद्दा जाति है, हिंदू एकता है, आरक्षण है, यूजीसी है। कितने दिन रहेगा कौन जाने, पर एक बार दालमंडी हो आना तो बनता था।