दुनिया 200 साल बाद

दिल्‍ली सल्‍तनत बनाम ‘नई हिंदी’ : ज़टल्‍ली से Gen-Z तक

A Gen-Z Placard at Jantar Mantar, Delhi

आप इंस्‍टाग्राम खोलिए, एक से एक नारे और एक से एक पिंगल सुनने-देखने को मिलेंगे जिन्‍हें आज तक इस देश में खुलकर कभी किसी इंकलाबी कार्रवाई में नहीं बरता गया था। दोस्‍त-यारों के बीच हंसी ठिठोली या मार-झगड़े के दौरान गाली-गलौज की बात अलग है। विडम्‍बना है कि यही शब्‍द अब सरकार-विरोधी जुटान को ताकत दे रहे हैं।  

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दुनिया 200 साल बाद

छावनी की जिंदगी, जिंदगी की छावनी…

हर बार कहीं कुछ संवेदनशील होता है तो वहां अचानक ‘छावनी’ क्‍यों बन जाती है? और ये अखबार वाले सकारात्‍मक लहजे में इसकी मुनादी क्‍यों करते हैं? आखिर इसका मतलब क्‍या है? छावनियों से बाहर रहने वाले इस देश के सवा अरब से ज्‍यादा लोगों को नहीं पता कि छावनी की जिंदगी कैसी होती है, जब तक कि उनके अपने शहर में किसी दिन कोई जगह छावनी नहीं बना दी जाती।

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