कोउ नृप होय हमै ही हानी… अमीनुल हक की यही कहानी!
दो सौ साल की उम्र वाले असम और पचहत्तर साल से ज्यादा उम्र वाले इस भारतीय गणतंत्र में नागरिकता का संकट हास्यास्पद स्तर तक राजाज्ञा और विशेषाधिकार का मामला बन चुका है
दिवाकान्त कान्तिं बिनाध्वान्तमन्तं नचाप्रोति लद्वज्जगत्यज्ञ लोक:।
समाचार सेवामृते ज्ञत्वमाप्तुं नशक्नोति तस्मात्करोमीति यत्नं।।
दो सौ साल की उम्र वाले असम और पचहत्तर साल से ज्यादा उम्र वाले इस भारतीय गणतंत्र में नागरिकता का संकट हास्यास्पद स्तर तक राजाज्ञा और विशेषाधिकार का मामला बन चुका है
वे खुद को इस देश का ‘प्रथम नागरिक’ कहते थे। उनका दावा था कि आधुनिक भारत में नागरिकता की कानूनी स्थिति एक ‘फर्जीवाड़ा’ है। आज यही बात दबी जबान वे तमाम बड़े-बड़े लोग कह रहे हैं जिन्हें पढ़ा-लिखा माना जाता है।