दुनिया 200 साल बाद

कोउ नृप होय हमै ही हानी… अमीनुल हक की यही कहानी!

Sculpture of the Ahom rebellion as seen in Shaheedi Park, Delhi.

दो सौ साल की उम्र वाले असम और पचहत्तर साल से ज्‍यादा उम्र वाले इस भारतीय गणतंत्र में नागरिकता का संकट हास्‍यास्‍पद स्‍तर तक राजाज्ञा और विशेषाधिकार का मामला बन चुका है

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दुनिया 200 साल बाद

नागरिकता की बहस में ग़ाज़ीपुर के एक गुमनाम बाग़ी की याद

वे खुद को इस देश का ‘प्रथम नागरिक’ कहते थे। उनका दावा था कि आधुनिक भारत में नागरिकता की कानूनी स्थिति एक ‘फर्जीवाड़ा’ है। आज यही बात दबी जबान वे तमाम बड़े-बड़े लोग कह रहे हैं जिन्‍हें पढ़ा-लिखा माना जाता है।

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