नागरिकता की बहस में ग़ाज़ीपुर के एक गुमनाम बाग़ी की याद
वे खुद को इस देश का ‘प्रथम नागरिक’ कहते थे। उनका दावा था कि आधुनिक भारत में नागरिकता की कानूनी स्थिति एक ‘फर्जीवाड़ा’ है। आज यही बात दबी जबान वे तमाम बड़े-बड़े लोग कह रहे हैं जिन्हें पढ़ा-लिखा माना जाता है।
