1826 के झरोखे से

‘उजियाली के घमंड’ में चूर ‘बहुत मोटे ओ बड़े’ लोगों के किस्से

Daniel Lambert

उदन्‍त मार्तण्‍ड में सम्‍पन्‍न लोगों की धन सम्‍पदा से लेकर उनके शारीरिक वैभव पर कटाक्ष भी छपते थे। दिलचस्‍प यह था कि समूचे वर्णन के बाद अंतिम पंक्ति में सम्‍पादक अपना पिंगल मार देते थे। ऐसे ही दो उदाहरण 1826 के भादो और अश्विन अंक से प्रस्‍तुत हैं, जिन्‍हें श्री ब्रजेन्‍द्रनाथ बनर्जी ने ‘विशाल भारत’ में पुनर्प्रकाशित किया था। ये दो कहानियाँ जिन दो व्यक्तियों के बारे में हैं, उनमें मोटे आदमी की मृत्यु 1809 और राजा की 1826 में हुई थी- जिस वर्ष उदन्त मार्तण्ड शुरू हुआ था।

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