अपने अखबारी जन्म के दो सौ वर्ष बाद ‘उदन्त मार्तण्ड’ का पहला डिजिटल अंक पाठकों के सामने प्रस्तुत है। इस अंक में कुल सात कहानियाँ हैं जो बंगाल के चुनाव के संदर्भ में लिखी गई हैं। उनके अलावा सबसे पहली कहानी ‘उदन्त मार्तण्ड’ के मूल छापाखाने की कलकत्ते में तलाश का एक प्रसंग है। मूल अखबार में प्रकाशक का जो इश्तेहार छपता था, उसकी मूल प्रति को पुनरुत्पादित किया गया है। बिल्कुल उसी भाषा और वर्तनी में, जैसा जुगल किशोर शुक्ल ने लिखा था।
1826 के झरोखे से
हिंदुस्तानियों के हित के हेत : इस कागज के प्रकाशक का इश्तेहार
दुनिया 200 साल बाद
दो सौ साल बाद 37, अमड़ातला गली की तलाश…
सड़क के रिश्ते
उस्ताद के उजड़े दयार पर तीन घंटे
काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस : कलकत्ता वाया बनारस
दालमंडी: काशी विध्वंस का सबसे संगीन अध्याय
बनारसियों के लिए दालमंडी कोई मुद्दा क्यों नहीं है? फिर भी लोग नाराज हैं…
बनारस में तहज़ीब के मरकज़ का मलबा देखिए…
बंगाल का खतरनाक प्रायश्चित उसे बनारस के करीब ला रहा है
