लुटियंस की अंधेरी दिल्ली में निजी मनोविकार का अंतिम प्रहार
हो सकता है कि प्रदर्शनकारियों के लिए सरकार का यह कदम अदृश्य वरदान जैसा कुछ साबित हो। अंधेरे के किले में रोशनी की सरकारी थिगली तले बैठने से वैसे भी क्या हासिल हुआ है आज तक!
दिवाकान्त कान्तिं बिनाध्वान्तमन्तं नचाप्रोति लद्वज्जगत्यज्ञ लोक:।
समाचार सेवामृते ज्ञत्वमाप्तुं नशक्नोति तस्मात्करोमीति यत्नं।।
हो सकता है कि प्रदर्शनकारियों के लिए सरकार का यह कदम अदृश्य वरदान जैसा कुछ साबित हो। अंधेरे के किले में रोशनी की सरकारी थिगली तले बैठने से वैसे भी क्या हासिल हुआ है आज तक!