‘वंदे भारत’ के अजनबी
दिल्ली के पंजाबी बनियों, हापुड़ के एक चौधरी साहब और कुछ मद्रासी श्रद्धालुओं की यह कहानी बताती है कि खाये पीये अघाये सभ्य समाज के भीतर भी कैसे कुछ लोगों को बेगाना और अजनबी बना कर खारिज कर दिया जाता है। बात बनारस की ही है, जहां अशोक ने अपने उत्पीड़न की अर्जी दी थी और जहां से श्रद्धालुओं की एक पार्टी दिल्ली की ट्रेन में चढ़ी।
