1826 के झरोखे से

दो सौ साल पहले विलायती कपड़े से शुरू हुई एक कहानी

अभी तो जी20 का जोर-जबर ही ठंडा नहीं पड़ा है, फिर ये नया नाम ब्रिक्‍स किसी की जबान पर कैसे चढ़ सकता है इतनी जल्‍दी! ये बात इससे समझ पड़ती है कि उस दिन शास्‍त्री भवन के पास पेड़ के नीचे बाल काटने वाले फुरकान ने बड़ी मासूमियत से पूछा था- भइया, ये जी ट्वेंटी फिर से होने जा रहा है क्‍या?

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