‘उदन्त मार्तण्ड’ के पहले ही अंक में श्रीमान् गवर्नर जनरल बहादुर का सभावर्णन दिया हुआ है। उस समय लार्ड एमहर्स्ट भारत के गवर्नर जनरल थे। ब्रह्मा की लड़ाई समाप्त हो चुकी थी, और ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रह्मा के राजाओं में उसी सन् में संधि हुई थी। ‘उदन्त मार्तण्ड’ में इस संधि की शर्तें प्रकाशित हुई थीं। इस संधि के उपलक्ष में जो दरबार हुआ था, उसी का वर्णन ‘श्री श्रीमान् गवरनर जेनरेल बहादुर का सभा वर्णन’ शीर्षक में दिया गया था। उसे भी मुलाइजा कीजिए।
‘’अंगरेजी 1826 साल 19 मे को सरकार कम्पनि अंगरेज बहादुर ओ ब्रह्माके बीचमें परस्पर सन्धि हो चुकने के प्रसंग से यह दरवार शोभनागार होके श्री श्रीमान लार्ड एमहसर्ट गवरनर जेनरेल बहादुर के साक्षात् से मौलबि महम्मद सलिलुद्दीन खां अवधबिहारी बादशाह की ओर से वकालत के काम पावने के प्रसंग से सात पारचे की खि़लअत् ओ जि़गा सर पेच जड़ाऊ मुक्ताहार ओ पालकि झालरदार ओ मृत महाराजा सुखमयि बहादुर के संतति राजा शिवचन्द्रराय बहादुर ओ राजा नृसिंह चन्द्रराय बहादुर राज्य ओ बहादुरी पदवी मिलने के प्रसंग से सात सात पारचे की खि़लअत जि़गा सरपेच जड़ाऊ मुक्त हार ढाल तलवार ओर चार घोड़े की सवारी की अनुमति ओ राय गिरधारी लालबहादुर ओर मिर्जा महम्मद कामिल खां नवाब नाजि़म बहादुर के विवाह के प्रसंग से छ छ पारचेकी खिलअत् जि़गा सरपेच जड़ाऊ ओ कृपाराम पंडित नवाब फैज मुहम्मद खां बहादुरकी ओर से पुरी वकालतका पद होने के प्रसंग से दोशाला गोशवारा नीमे आस्तीन सरपेच जड़ाऊ पगड़ी ओर विश्वंभर पंडित की स्त्री के एकटिंग वकील देविप्रसाद तिवाड़ी दोशाला ओर मुहम्मद सअीद खां साहिब ओ राजा भूपसिंह बहादु कोटे के एक-एक हारसे भूषित ओ कृतकृत्य हुए ओ जालवनके रईसके वकील शिव राय ने श्री श्री नखर गवरनर जेनरेल बहादुरके साक्षातकार इस संधिके बधाईकी कविता भेट धरी ओर नर: श्रेष्ठ उस कविताका भाव बूझे पर बहुत रीझे।‘’
पहले पैरा की भाषा श्री ब्रजेन्द्रनाथ बनर्जी की है। मूल लेख की भाषा के संदर्भ उन्हीं की लिखी पाद टिप्पणी की तस्वीर नीचे है।

