सड़क के रिश्ते
दो दिन हुए हमें कलकत्ते में आए। शहर में बसंत उतरा हुआ सा महसूस होता है लेकिन गर्मी की आहट भी सुनाई दे रही है। सियालदह स्टेशन के बाहर निकलते…
दिवाकान्त कान्तिं बिनाध्वान्तमन्तं नचाप्रोति लद्वज्जगत्यज्ञ लोक:। समाचार सेवामृते ज्ञत्वमाप्तुं नशक्नोति तस्मात्करोमीति यत्नं।।
दो दिन हुए हमें कलकत्ते में आए। शहर में बसंत उतरा हुआ सा महसूस होता है लेकिन गर्मी की आहट भी सुनाई दे रही है। सियालदह स्टेशन के बाहर निकलते…
पंडित जुगल किशोर शुक्ल कलकत्ता से प्रकाशित अपने अख़बार ‘उदन्त मार्त्तण्ड’ में ‘इस कागज़ के प्रकाशक का इश्तिहार’ के शीर्षक से जो सूचना छापते थे उसमें अख़बार का पता बताया…
दिवाकान्त कान्तिं बिनाध्वान्तमन्तं
नचाप्रोति लद्वज्जगत्यज्ञ लोक:।
समाचार सेवामृते ज्ञत्वमाप्तुं
नशक्नोति तस्मात्करोमीति यत्नं।।